प्रयोगशाला सेवाएं

राष्ट्रीय डोपिंग रोधी प्रयोगशाला विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) द्वारा मान्यता प्राप्त है जिसकी वार्षिक आधार पर समीक्षा की जाती है। एजेंसी निम्नलिखित शर्तों के तहत मान्यता प्रमाणपत्र प्रदान करती है:

  • आईएसओ 17025 मान्यता परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए लागू है। यह मान्यता एनडीटीएल को 2003 में नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर कैलिब्रेशन एंड टेस्टिंग लेबोरेटरी (एनएबीएल) द्वारा प्रदान की गई थी।
  • वाडा इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स फॉर लेबोरेटरीज (आईएसएल) का अनुपालन।
  • सभी दक्षता परीक्षण कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करना।

प्रवीणता परीक्षण

  • विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) – राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (राडोपप्र) 2006 से वाडा के दक्षता परीक्षण दौर में भाग ले रहा है जिसका नाम जिसे अब वाडा ने बाहरी गुणवत्ता आश्वासन योजना (ईक्यूएएस) कर दिया है।
  • वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ एंटी डोपिंग साइंटिस्ट्स (WAADS): वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ एंटी डोपिंग साइंटिस्ट्स का गठन वर्ष 2000 में किया गया था। (राडोपप्र) 2004 से WAADS के प्रवीणता परीक्षण दौर में भाग ले रहा है। डॉ शीला जैन और डॉ. अलका बेओत्रा 2000 से WAADS की सदस्य हैं<
  • कॉलेज ऑफ अमेरिकन पैथोलॉजिस्ट (सीएपी):राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (राडोपप्र) 2004 से उत्तेजक और नारकोटिक्स की श्रेणी में दवाओं के लिए सीएपी पीटी कार्यक्रम में भाग ले रहा है।
  • स्विस सेंटर फॉर क्वॉलिटी कंट्रोल (सीएससीक्यू) राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (राडोपप्र) रक्त मानकों के लिए 2010 से सीएससीक्यू द्वारा आयोजित प्रवीणता परीक्षण में भाग ले रहा है।
  • नमूना परीक्षण:

    प्रयोगशाला वर्ष में 7000 नमूनों (लगभग) के परीक्षण के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के नमूनों का परीक्षण कर रही है। लैब द्वारा पहला अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण। वर्ष 2003 के दौरान एमबीसी लैब, टोक्यो के सहयोग से किया गया था, (हैदराबाद, भारत में आयोजित पहला एफ्रो एशियाई खेल) जिसमें 313 नमूनों का विश्लेषण किया गया था। प्रयोगशाला को टोक्यो, जापान की वाडा मान्यता प्राप्त लैब के सहयोग से खेलों के लिए परीक्षण करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) की अस्थायी मान्यता मिली।

    एनडीटीएल के पास अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं हैं और यह विभिन्न परियोजनाओं पर अनुसंधान करने में लगी हुई है। शोध पत्र अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत किए जा रहे हैं और अनुक्रमित पत्रिकाओं में प्रकाशित किए जा रहे हैं।